अब पूज्य माता जी मन में विचारने लगीं कि बड़े-बूढ़ों से प्राय: यह सुना जाता है कि या तो मणियुक्त शिशु की आयु बहुत कम होती है या उसकी माता की। वे दिल ही दिल में आपकी दीर्घ आयु के लिए बलैयां लेने लगीं। आपजी की पूज्य मातुश्री सत्त्वगुण प्रधान साधु प्रकृति की थीं। काश! कि पूज्य माता जी को आपकी पावन अद्भुत लीलाओं को निरखने का समय मिलता, परन्तु ऐसा न हुआ। वे इस विलक्षण गुणों से युक्त विभूति को जन्म देकर कुछ समय बाद इस संसार से चल बसीं। नामकरण के दिन आपका शुभ नाम श्री द्वारा राम जी रखा गया। पण्डित जी ने उस दिन आपके मस्तक पर एक अति दिव्य ज्योति देखी। पुन: उन्होंने जब श्री चरण-कमलों तथा कर-कमलों को निहारा तो एक अलौकिक महापुरुष के चिन्हों व चक्रों से युक्त पाया। उन्होंने मन ही मन प्रसन्न होकर वन्दना की। केवल इतने ही शब्द मुख से उच्चरित कर मौन हो गये कि यह तो कोई विलक्षण बालक ही दिखाई देता है। मुखमण्डल निहार-निहार कर अपने को कृतार्थ करने लगे। बस मन में एक वेदना भरी हूक उठी जिसे ओठों के बीच ही गुनगुना कर रह गए----वे पंडित जी। वह हूक थी----""काश! मैं भी इतने समय तक जीवित रह सकूँ जिससे इस शिशु के बढ़ते हुए यश व पावन लीलाओं को निरख सकूँ।''
आपकी अवस्था अभी बालपन तक भी न पहुँची थी कि आप मातृ-सुलभ स्नेह से वंचित हो गए। आपके पालन-पोषण का सौभाग्य आपकी फूफी जी को मिला। वे बड़े लाड़-प्यार से आपको पुचकारतीं तथा मातृ-वात्सल्य एवं प्यार से परिपूर्ण करने का प्रयत्न करतीं, परन्तु जिनमें अपने आप में ही एक दिव्य आनन्द व त्रिलोकी को प्रेम प्रदान करने की शक्ति निहित थी, वे इस स्वयं निर्मित प्यार को क्या जानें। आपकी आयु जब लगभग चार-पांच वर्ष की हुई, तभी आपने लक्की (भाग्यशालिनी नगरी) के भाग्य जगाने के लिए बाल-सुलभ क्रीड़ाएँ आरम्भ कर दीं। जानबूझ कर रूठ जाना, किसी टीले के समीप बैठकर निज आत्म-स्वरूप का आनन्द लेना, आँख मिचौनी के दृश्य व मधुर भाषा में फूफी जी के दिल को बहलाना, कभी तन पर धूलि रमाकर मुसकराना, आपकी प्रिय क्रीड़ाएँ थीं। फूफी जी आपको कहतीं----""बेटा! इतने उच्च तथा धन-धान्य सम्पन्न कुल में जन्म लेकर धूलि में लोटना अच्छा नहीं।'' आप बड़े गर्व से उत्तर देते कि ""फ़कीरी में तो जीवन का रस भरा हुआ है।'' आपके इन वचनों को सुनकर फूफी जी बहुत उदास होतीं और सोचने लगतीं कि क्या इस बच्चे का भविष्य ऐसा ही होगा ? पण्डित जी ने तो अनुपम गुणसम्पन्न कहा था, परन्तु यह तो फ़कीर बनना चाहता है।
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