Friday, June 17, 2016

17.06.2016

अभी तो आपने सिन्ध में लक्खी स्थान में ही पदार्पण किया था, आपने तो सम्पूर्ण सिन्ध में परमार्थ की ज्योति का प्रकाश फैलाना था। सिन्धी लोगों की साधु-महात्माओं में सहज श्रद्धा थी। अतः  अन्होंने सहज इस पथ को स्वीकार किया। अज्ञान के अन्धकार में भटकते हुए सिन्धी प्रेमीजन प्रेम के देव को पाकर प्रेम-विभोर हो गए। उनकी जन्म जन्मांतरों की तृषा ने ऐसा संयोग बनाया। थोड़े समय में ही आपने सिन्ध सिन्ध में सत्संग आश्रम स्थापित कर सिन्धी भाषा भी सीख ली। आपने गुर-भक्ति का जो बीज सिन्ध में बोया, वह दिन-प्रतिदिन फलने फूलने लगा। सैंकड़ों प्रेमी व जिज्ञासु इस पावन नामोपदेश के तीर्थ में मज्जन करने लगे। परिणामस्वरूप आपकी महिमा संपूर्ण सिन्ध तथा आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। दूर व समीम से संगतें श्री दर्शन व सत्संग-उपदेश श्रवण करने के लिए आने लगीं। आप प्रायः यह प्रवचन फरमाते थे-
''मानव मानव अंतरा, कोई हीरा तो कोई कंकरा।''
संसार में अपने पूर्व जन्म के संस्कारों के परिणामस्वरूप मानव जन्म तो मिल गया, परन्तु मनुष्य मनुष्य में भी अन्तर होता है। इनमें से कुछ हीरें के समान हैं, शेष कंकरों के समान। अर्थात जिसने मानव जन्म पाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयत्न नहीं किया, प्रभु मिलन की जिसने दिल में तड़प ही पैदा नहीं की, वह मानव जन्म पाकर भी चौरासी लाख योनियों में जाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे जीवों को सन्त महापुरुषों ने कंकरों का दर्जा दिया है। जिन्होंने मानव जन्म को पाकर  पूर्ण पुरुषों की संगति में उनसे अनमोल नाम रूपी हीरे को प्राप्त किया तथा उस नाम (अथवा शब्द) की कमाई की, उनका जीवन हीरे के समान है। हीरा अत्यन्त मूल्यवान वस्तु है, परन्तु इसकी अपेक्षा कंकरों का क्या मूल्य है? कंकरों को सब पांव के नीचे ही रौंदते हैं। इसी प्रकार ही मानव जीवन की कीमत केवल सन्त-महापुरुष ही जानते हैं , वही इस हीरे की परख करते हैं।
      यह संसार सागर की न्याई है। इससे पार उतरने का ढंग सन्त महापुरुष समय के सन्त सद्गुरु ही बताते हैं। जिस मनुष्य ने सन्त महापुरुषों की सुसंगति ग्रहण कर ली, वह उच्च संस्कारी आत्मा है। यह उच्च संस्कारी आत्मा ही मानव जन्म रूपी हीरे का मूल्य पहचान सकती है। अतः महापुरुष यही उपदेश देते हैं कि ऐ जीव! अपने मानव जीवन के ध्येय को प्राप्त कर और इस संसार सागर से पार हो जा। मानव जीवन को प्राप्त करने का यही परम लक्ष्य है। अपने लक्ष्य की पहचान कर।

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