Friday, July 1, 2016

30.06.2016

श्री सद्गुरुदेव महाराज जी श्री तीसरी पादशाही जी सिन्ध लौट आए। यहां पर गाँव गाँव में आप आत्म-ज्योति को दर्शाने हेतु अनवरत परमार्थ-पथ पर आरूढ़ रहे। आपने श्री चकौड़ी सन्त आश्रम में श्री सद्गुरुदेव महाराज जी ( श्री दूसरी पादशाही जी) के श्री चरणों में सिंध में कृपा करने के लिए विनय की। आपकी विनय स्वीकार कर श्री सद्गुरुदेव महाराज जी सन् 1934 में अन्तिम बार लक्खी (सिन्ध) पधारे। वे आपको प्रथम दृष्टि में ही पहचान चुके थे कि आपका अवतार भी परमार्थ के कार्य को चलाने के लिए हुआ है, इसीलिए तो उन्होंने आपको साधु वेष प्रदान करते ही आपके अपने नाम पर ही उपदेश देने की आज्ञा दी थी। अब इस रहस्य को सबके सामने सांकेतिक भाषा में प्रकट करने लगे। श्री सद्गुरुदेव महाराज जी (श्री दूसरी पादशाही जी) लक्खी (सिंध) में शहर के स्थान के चौबारे पर विराजमान थे और सप्ताह में एक बार संगत को नीचे आकर श्री दर्शन देने की कृपा करते थे। थोड़ी से देर संगत को श्री दर्शन देकर फिर बाहर घूमने के लिए चल देते थे। दूर-दूर से संगत श्री दर्शन के लिए आई हुई थी। एक दिन सारी संगत ने मिलकर श्री सद्गुरुदेव महाराज जी श्री दूसरी पादशाही जी के श्री चरणों में विनय की कि आज वे अपने मुखारविन्द से प्रवचनामृत की वृष्टि करें। श्री सद्गुरुदेव महाराज जी ने मुसकरा कर फ़रमाया- "संसार में जिसका बेटा समझदार और काम करने के योग्य हो जाता है, वह सारा कार्य अपने सुपुत्र को सौंपकर निश्चिन्त हो जाता है। स्वयं आराम करता है। अब हमारा यह प्रिय शिष्य (श्री स्वामी जी श्री तीसरी पादशाही जी की ओर संकेत करते हुए) कबीर (अर्थात बड़ा) हो चुका है। अब तुम लोगों को ये सत्संग सुनाएँगे और हम विश्राम करेंगे। जो इनके श्री वचनों पर चलेगा तथा उनपर आचरण करेगा वह हमारे आशिर्वाद का पात्र होगा।"
      महापुरुषों के रहस्य को कौन समझ सकता है कि श्री सद्गुरुदेव महाराज जी कौन से आराम फ़रमाने के सम्बन्ध में वचन फ़रमा रहे थे। जब सन् 1936 में श्री सद्गुरुदेव महाराज जी श्री दूसरी पादशाही जी निजस्वरूप में लीन हो गए, तब उनका यह रहस्य सबपर प्रकट हुआ। यहां सिन्ध में श्री सद्गुरुदेव महाराज जी श्री दूसरी पादशाही जी ने सन् 1934 का दीपावलि पर्व मनाया। इसके पश्चात वे अन्य स्थानों में सत्संग-उपदेश करते हुए चकौड़ी सत्संग आश्रम में विराजमान हुए। 1934 की दीपावलि के पश्चात सब महात्माजनों को चकौड़ी सन्त आश्रम में बुलवाकर रूहानी उत्तराधिकारी के विषय में रहस्य प्रकट किया, जिसमें आपको (श्री स्वामी जी श्री तीसरी पादशाही जी महाराज को) रूहानी उत्तराधिकारी बनने के विषय में सबके सम्मुख वचन किये। पुनीत निर्देश श्री सद्गुरुदेव महाराज जी श्री दूसरी पादशाही जी के जीवन-चरित्र में आ चुके हैं।

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